Friday, February 5, 2021

हसरत

 

तेरी रह-गुज़र में बिखर जाने की हसरत है

इन आँखों के समन्दर में उतर जाने की हसरत है

नहीं कहता तू मुझको अपनी हसरत बना के जी

मुझे तो तेरी दीवानगी में मर जाने की हसरत है।

                            ~सतीश रोहतगी

14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (07-02-2021) को "विश्व प्रणय सप्ताह"   (चर्चा अंक- 3970)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --
    "विश्व प्रणय सप्ताह" की   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    Replies
    1. जी सर बहुत बहुत आभार

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  2. नहीं कहता तू मुझको अपनी हसरत बना के जी
    मुझे तो तेरी दीवानगी में मर जाने की हसरत है।

    वाह
    बहुत ख़ूब...

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  5. उम्दा अशआर ..🌹🙏🌹

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  6. Replies
    1. बहुत खूब सतीश जी!
      दीवानगी की सशक्त अभिव्यक्ति। हार्दिक शुभकामनाएं।

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